ब्रह्मांड में एलियन भी मौजूद... भारतीय मूल के वैज्ञानिक निक्कू मधुसूदन ने खोजा पृथ्वी से ढाई गुना बड़ा ग्रह!
2025-04-21 IDOPRESS
नई दिल्ली:
भारतीय-ब्रिटिश खगोलशास्त्री डॉ. निक्कू मधुसूदन और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में उनकी टीम ने K2-18b नामक एक दूर के ग्रह पर एलियन जीवन के संभावित संकेतों की पहचान की है. नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) की मदद से टीम ने डाइमिथाइल सल्फाइड (DMS) और डाइमिथाइल डाइसल्फ़ाइड (DMDS) गैसों की मौजूदगी का पता लगाया,जो विशेष रूप से ध्यान देने लायक हैं,क्योंकि ये समुद्र में मौजूद समुद्री शैवाल द्वारा प्रोड्यूस होते हैं.
डॉ. निक्कू मधुसूदन कौन हैं?
भारत में 1980 में जन्मे,डॉ. मधुसूदन ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान,BHU,वाराणसी से B.Tech. की डिग्री हासिल की. बाद में,उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से मास्टर डिग्री के साथ-साथ पीएचडी भी की. 2009 में उनकी पीएचडी थीसिस हमारे सौर मंडल के बाहर के ग्रहों के वायुमंडल का अध्ययन करने के बारे में थी,जिन्हें एक्स्ट्रासोलर ग्रह कहा जाता है.पीएचडी के बाद,उन्होंने एमआईटी,प्रिंसटन विश्वविद्यालय और येल विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता के रूप में कई पदों पर काम किया,जहां वे वाईसीएए पुरस्कार पोस्टडॉक्टरल फेलो थे. 2013 में वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में शामिल हुए और चार साल तक खगोल भौतिकी में विश्वविद्यालय के व्याख्याता के रूप में काम किया. उन्हें 2017 में खगोल भौतिकी और एक्सोप्लेनेटरी विज्ञान में रीडर के रूप में पदोन्नत किया गया. वह वर्तमान में खगोल भौतिकी और एक्सोप्लेनेटरी विज्ञान के प्रोफेसर के रूप में काम करते हैं.
डॉ. मधुसूदन ने हाइसीन ग्रहों को लेकर किया रिसर्च
डॉ. निक्कू मधुसूदन ने हाइसीन ग्रहों को लेकर रिसर्च किया,जिन्हें जीवन की तलाश को लेकर ग्रहों का सबसे अच्छा वर्ग माना जाता है. हाइसीन ग्रहों का वातावरण हाइड्रोजन से भरा हुआ है,और उसके नीचे महासागर हैं. डॉ. मधुसूदन के रिसर्च में उनके वायुमंडल,अंदरूनी भाग और उनके निर्माण का अध्ययन शामिल है. उनके काम में हाइसीन दुनिया,उप-नेपच्यून और बायोसिग्नेचर की खोज भी शामिल है. वह HST,JWST और बड़े ग्राउंड-आधारित दूरबीनों की मदद से एक्सोप्लैनेट के लिए रेडियेटिव ट्रांसफर,प्लैनेटरी केमेस्ट्री और एटमॉस्फेरिक रिट्रीवल मेथड्स पर भी काम करते हैं.2012 में उन्होंने 55 कैनक्री ई नामक एक ग्रह का अध्ययन किया,जो पृथ्वी से बड़ा है,और सुझाव दिया कि इसका आंतरिक भाग कार्बन युक्त हो सकता है. 2014 में उन्होंने एक टीम का नेतृत्व किया,जिसने तीन गर्म जुपिटर्स में पानी के स्तर को मापा और अपेक्षा से कम पानी पाया. 2017 में,वह उस टीम का हिस्सा थे,जिसने WASP-19b ग्रह के वायुमंडल में टाइटेनियम ऑक्साइड का पता लगाया था. वहीं 2020 में उन्होंने K2-18b का अध्ययन किया और पाया कि इसकी सतह पर पानी मौजूद हो सकता है.